
चंबा। कॉलेज में एससीए पर कब्जा जमाने के लिए छात्र संगठनों ने पूरी ताकत झोंक दी है। छात्र संघों ने जोरशोर से प्रचार शुरू कर दिया है। इस बार जिला के एकमात्र डिग्री कॉलेज में एबीवीपी पर खाता खोलने का दबाव रहेगा। दूसरी ओर एसएफआई को भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। उधर, कांग्रेस सरकार के सत्ता में होने का लाभ उठाते हुए एनएसयूआई इस बार जिला भर में दम दिखाने की रणनीति बना रही है। चंबा कॉलेज में चौथा छात्र संगठन भी इस बार मैदान में उतरने जा रहा है। एआईएसएफ ने भी अपना पैनल उतारने की घोषणा कर रखी है। इन संगठनों ने अभी तक अपने चुनावी योद्धा मैदान में नहीं उतारे हैं। गत वर्ष के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एनएसयूआई ने सबसे ज्यादा सीटें झटक कर जिला में पहला स्थान प्राप्त किया था। एबीवीपी दूसरे व एसएफआई तीसरे स्थान पर रही थी। उल्लेखनीय है कि एबीवीपी पिछले चार सालों से चंबा कॉलेज में अपना वर्चस्व कायम करने में नाकाम रही है। वर्ष 2008 में 14 साल के बाद एबीवीपी ने चंबा कॉलेज की दो मुख्य सीटों पर कब्जा जमाया था। उसके बाद 2012 तक एक भी सीट एबीवीपी के खाते में नहीं गई। एनएसयूआई के परिसर अध्यक्ष चंदन नरूला, एबीवीपी के भुवनेश भारद्वाज और एसएफआई के परिसर सचिव सुदेश राजपूत ने अपने-अपने संगठन की ओर से इस बार बेहतर प्रदर्शन का दावा किया है।
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यह है पिछले साल की स्थिति
पिछले साल चंबा कॉलेज में तीन सीटों पर एनएसयूआई, एक सीट पर एसएफआई, चुवाड़ी कॉलेज में चारों सीटें एसएफआई, सलूणी कॉलेज में एक एबीवीपी, एक एसएफआई और दो सीटों पर एनएसयूआई के उम्मीदवार जीते थे। भरमौर कॉलेज में एक एबीवीपी, तीन एनएसयूआई तथा बनीखेत कॉलेज में एनएसयूआई ने चारों सीटों पर कब्जा जमाया था। पांगी कॉलेज में सहमति से एससीए का चुनाव किया था।
